इश्वर मानव की सबसे बडी खोज व भूल है।

इश्वर मानव की सबसे बडी खोज व भूल है। ९० प्रतिशत आबादी
उस वस्तु मे विश्वास करती है जिसने उसे देखा तक नही। मानव मे
अपने समाज पर अधिकार पाने की लालसा होती ही है, येन केन
प्रकरेण। इश्वर की खोज भी बाकी बेबसों पर राज्य करने की
चेष्ठा है। इश्वर की खोज उस समय आवश्यज थी जब प्राकृतिक
घटनायें औरन् उनके कारण अज्ञात थे। अपनी समझे के आधार पर
व्याख्या व जीवन के नियम तय किये गये। विज्ञान के सहारे जैसे
जैसे चीजें स्पष्ट होती गयी नियम और समझ बदलते गये -- लेकिन
अमनी हुकूमत कायम रखने हो धार्मित नेताओं ने नियम नही बदले
वरन आधुनिक ज्ञान के आधार पर उनको संशोधित कर दिया।
राज्य कायम रहे। धर्म परिवर्तन, धारमिक दतभेदत, युद्द, स्त्रियो
से भेद भाव -- इस्लाम मे बुरके मे ढक देने की परंपरा -- सब शोषण है।
इस्वर ने सबसे ज्यादा जाने लीं हैं। 'मानव' ने हमेशा संधि की
चेष्ठा की है। जिस दिन हम इश्वर की बजाये मानव ने आस्था
स्थापित कर लेंगे। विश्व की सारी साम्स्या समाप्त हो
जायेगी।

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